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आदरणीय  नीतीश कुमार जी , प्रख्यात अर्थशास्त्री श्री जगदीश भगवती ने कहा था कि उच्च विकास दर गरीबो के लिए भी फायदेमंद हो सकता है और गरीब जनता इसका इनाम भी देती  है .बिहार मे आपको  पिछले 15 वर्षो से  मिला समर्थन इस बात को पुष्टि करता है कि जातीय फॉर्मूले के ध्वस्त करके बिहार के लोगों ने आपके सुशासन पर भरोसा कायम रखा है । लेकिन १४-१८ घंटे की बिजली ,चमचमाती सड़कों के बीच ग्रामीण अंचलो में बढ़ती बेरोजगारों की फ़ौज ,कृषि क्षेत्रो में बढ़ रहे पलायन ,ऊपर से नीचे तक फैले भ्रष्टाचार और लगातार बंद पड़े उद्योग आपके सुशासन की कलई खोल रहा है। अपने हलिया बिहार दर्शन में  मैं इस सचाई से अवगत हुआ किआपके सुशासन की धार कुंद पड़ती जा रही है और जनता दलालों के संगठित गिरोह के सामने बेवस है और आप नशाबंदी ,बाल विवाह और दहेज़ जैसी सस्ती लोकप्रियता लेने को आतुर हैं। ये पिटे हुए मुद्दे हैं ,ये आपको जननायक नहीं बनाएंगे। 

.जिस बिहार मे बाढ़ के नाम पर हर साल २००-२५० करोड़ रूपये का घोटाला आम बात है  ,कभी चारा घोटाला ,सृजन घोटाला ,कभी साडी घोटाला तो कभी अलकतरा घोटाला ,घोटालों की लम्बी फेहरिस्त  ने आज चारा घोटाला को इतिहास मे …
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इनदिनों  दिल्ली के मीडिया में इतना शोर क्यों है भाई ? क्या इसलिए कि  मीडिया अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा सजग हो गया है या फिर सोशल मीडिया ने उसकी जमीन खिसका दी है। या फिर खबरों और तर्क के आकाल में मीडिया के स्वनामधन्य एंकर  अपनी सुविधा से नए तर्क गढ़ रहे हैं। लेकिन अपने अपने तर्कों को लेकर जिस बेहूदापन और ओछी हरकत को टी आर पी बनाया जा रहा है वह कही से लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ नहीं लगता बल्कि यह  सभ्य समाज के लिए गाली है। गौरी लंकेश की दुखद हत्या की खबर को दिल्ली के  मीडिया ने  मसाला बना दिया। ,लोकतंत्र में आज़ादी के नाम पर देश के प्रधानमंत्री तक  को गाली देने में कोई कोताही नहीं बरती यह जानते हुए भी कि घटना कर्नाटका में हुई जवाब कांग्रेस के मुख्यनत्री सिद्धिरामय्या को देना है लेकिन सवाल नरेंद्र मोदी से पुछा जा रहा है। 

यह इसलिए कि घटना के तुरंत  बाद राहुल गाँधी ने ट्वीट करके इस हत्या में बीजेपी और  आरएसएस का नाम लिया था। एन डी टी वी के वरिष्ठ एंकर रवीश कुमार  कहते है यह शक इसलिए पैदा करता है क्योंकि गौरी लंकेश संघ की विचारधारा के खिलाफ लिखती रही है। लेकिन अल्ट्रा माओइस्ट विचारधारा की  गौ…

देश बदल रहा है ,आगे बढ़ रहा है

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पी एम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार से  कई भ्रम टूटे  हैं। मीडिया के कुछ वरिष्ठ लोगों का यह भ्रम कि सत्ता के अंदर और बहार की खबर वे ब्रेक कर सकते हैं। कुछ लोगों का यह भ्रम कि सरकार अक्सर  मीडिया की नजरों से व्यक्तित्व की परख करती है। कुछ लोगों का यह भ्रम कि मंत्रिमंडल का  विस्तार  जाति और क्षेत्र से तय होता है । कुछ बुद्धिजीवियों का यह भ्रम कि  सरकार के हर फैसले में आर एस एस का नाम जोड़कर खबरों में बहस की गुंजाइस बनायीं जा सकती है। पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जिन फेक खबरों को हवा दे रहा था। हमारे अनुभवी टीवी पत्रकार उसे सच मानकर डंके की चोट पर और  खबर तह तक का विश्लेषण कर रहे थे। 

सरकार और पॉलिसी को लेकर हमने जो फ्रेम बनाया है उसके इतर देखने समझने की सोच हमने विकसित नहीं की है। पिछले 28  वर्षो से गठबंधन की सरकार की पैटर्न हमारी सोच को लगभग कुंठित कर रखी है। जाहिर है इस फ्रेम से बाहर न तो देश के बुद्धिजीवी निकल रहे हैं न ही मीडिया और न ही नौकरशाही। जरा सोचिये आर के सिंह , सत्यपाल  सिंह ,  अल्फोंज कन्नाथम ,हरदीप   सिंह  पुरी ऐसे कई नाम हैं जिनके नाम की चर्चा संघ…

जिम्मेदारी सबकी बनती है

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यह तन विषय की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जान...  भारत की गुरु -शिष्य  परम्परा में कबीर ने भी मुक्ति और मोक्ष के लिए गुरु को ही साधन माना था। पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में गुरु की इस  शानदार रिवायत  ने सामाजिक जीवन में इंसानियत के आदर्शो को गौरवान्वित किया था। और जीवन में त्याग को ही आदर्श बना दिया। पंचकूला में  32 लोगों की जानें बाबा के  आदर्शो को बचाने में नहीं गयी है बल्कि  बाबा के  अहंकार और लालच ने मासूमो की जान ले ली है।  जब से तथाकथित गुरुओ  ने " डेरा " को स्थायी निवास मानना कर शुरू  दिया।  डेरा का रास्ता सत्ता और बाजार से जोड़ दिया तबसे बाबा  राम रहीम ,रामपाल ,आशाराम ,भीमानंद ,नित्यानंद,जय गुरु देव ,रामवृक्ष  जैसे गुरुओं ने बाज़ार और भक्तो के जरिये अपने डेरों को पावर सेंटर /वोट बैंक में तब्दील कर दिया और सियासी दलों को  डेरा के  चौखट पर ला खड़ा कर दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल मीडिया के उन  बुद्धिजीवियों से भी है जो कभी डेरा को आध्यात्मिक केंद्र बताकर टीवी चैनलों पर उनका महिमामंडन करते हैं। और कभी बाबा को चरित्रहीन बताकर उनके भक्तो को भड़का…

बाढ़ :उपेक्षित बिहार हर बार सियासत का ही शिकार होता है

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बाढ़? ” 
“बकरा नदी का पानी पूरब-पश्चिम दोनों कछार पर ‘छहछह’ कर रहा है। मेरे खेत की मड़ैया के पास कमर-भर पानी है।”
“दुहाय कोसका महारानी!” 
इस इलाके के लोग हर छोटी-बड़ी नदी को कोसी ही कहते हैं। कोसी बराज बनने के बाद भी बाढ़?... कोसका मैया से भला आदमी जीत सकेंगे? 
..लो और बांधों कोसी को! 
“अब क्या होगा?” कल मुख्यमंत्रीजी ‘आसमानी-दौरा’ करेंगे।
...केंद्रीय खाद्यमंत्री भी उड़कर आ रहे हैं।नदी-घाटी योजना के मंत्रीजी ने बयान दिया है।और रिलीफ भेजा जा रहा है। चावल-आटा-तेल-कपड़ा-किरासन-तेल-माचिस-साबूदाना-चीनी से भरे दस सरकारी ट्रक रवाना हो चुके हैं।
...कल सारी रात विजिलेंस कमिटी की बैठक चलती रही।

फणीश्वरनाथ रेणु के 40 साल पुराने संस्मरण को पढ़कर लगा ,कुछ भी तो नहीं बदला है। .बिहार, बाढ़ और भ्रष्टाचार की कहानी में। गंगा ,सोन ,पुनपुन ,फल्गु ,कर्मनाशा ,दुर्गावती ,कोसी ,गंडक ,घाघरा ,कमला ,भुतही बलान ,महानंदा इतनी नदियाँ जो जीवन धारा बन सकती थी लेकिन साल सिर्फ तबाही लाती है और हमारी सरकार फिर  अगलीबार का इन्तजार करती है।  बिहार के 18 जिलों में जलप्रलय है 2 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित है। 155 से  ज्यादा लोग मार…

गाली से न गोली से बात बनेगी बोली से : पी एम मोदी का नया संकल्प

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आज़ादी के 70 वें सालगिरह पर प्रधानमंत्री मोदी का लाल किला से सम्बोधन एक नयी शुरुआत ,एक नयी पहल का आगाज है ।   नए भारत के संकल्प के साथ  कश्मीर पर सरकार का दृष्टिकोण कश्मीरियत से लवरेज है  जिसमे हिंसा की कोई जगह नहीं होगी। "गाली से न गोली से बात बनेगी गले लगाने से प्यार की बोली से " क्या वाकई में ऐसे हालत कश्मीर में है या प्रधानमंत्री ने  इस दर्शन को आगे रखकर एक नयी शुरुआत का मन बनाया है ? 

याद कीजिये "बम से न गोली से बात बनेगी बोली"  से अटल जी  के दौर में तत्कालीन सी एम मुफ़्ती मोहम्ममद सईद ने यह नारा दिया था। कश्मीर में एक नयी पहल की जीद  अटल जी ने  की थी ।याद दिलाने की जरूरत यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में मिलिटेंसी इससे ज्यादा गंभीर थी। श्रीनगर अस्सेम्ब्ली और संसद पर  अटैक उन्ही के दौर में हुआ था लेकिन वाजपेयी ने कश्मीर में अपना तार कभी टूटने नहीं दिया। जो लोग कहते थे अब्दुल्लाह के बिना कश्मीर नहीं ,बिना रिगिंग के वोट नहीं वहा फ्री एंड फेयर इलेक्शन करवाकर गैर अब्दुल्लाह फैमिली के शख्स को शासन में आने का मौका उन्होंने  फ़राहम कराया। पहलीबार यहाँ जम्हूरियत क…

इन १००००० बच्चो को किसने मारा

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5 दिनों में 60 बच्चो की मौत ! जिम्मेदार कौन ? सन 1978  से 1  लाख बच्चों  ने गोरखपुर  के इसी बी आर डी  मेडिकल कॉलेज ,हॉस्पिटल में दम तोडा है। तो इस शर्म से हमारे तीन पीढ़ियों के नेताओं को डूब मरना चाहिए।  उत्तर प्रदेश के 7  जिले और बिहार के तीन जिलों में मानसून सीजन  में  हर साल हजारो बच्चो पर  इंसेफ्लाइटिस /  ब्रेन फीवर मानो काल  बन कर टूटता है और हर साल 700 -800 बच्चो को अपनी  माँ के आँचल से छीन लेता है। तक़रीबन 3 करोड़ की आवादी वाले पूर्वांचल के इन जिलों में एक मात्रा यह हॉस्पिटल अपने टूटी फूटी व्यवस्था से हजारो माताओ को यह आस्वस्त करता रहा कि उसका बच्चा जरूर घर लौटेगा लेकिन अक्सर माँ अपने सूनी आँचल के साथ ही घर लौटती है। वजह इलाके के नीम /हाकिम से इलाज कराकर ,थके हारे माता पिता बी आर डी मेडिकल कॉलेज के शरण में आता  है लेकिन अफ़सोस इन  40  वर्षो में इस महामारी से लड़ने के लिए हमने बिलखते माताओ को अकेले छोड़ दिया। 
मीडिया आज सी एम योगी से जवाब मांग रहा है ,माँगना चाहिए क्योंकि वे आज मुख्यमंत्री हैं और 20 वर्षो से गोरखपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं लेकिन सवाल उन साबिक मुख्यमंत्रियों से  क्य…