हिंदू आतंकवाद, इस्लामिक आतंकवाद और देश की सियासत



पिछले छः महीने में ६ सिरिअल बोम्ब ब्लास्ट हुए है जिसमे २५० से ज्यादा लोग मारे गए हैं । अगर मौजूदा केन्द्र सरकार की बात करे तो इनकी एक बड़ी उपलब्धी में यह शुमार किया जा सकता है कि पिछले वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में ७१ बोम्ब ब्लास्ट हुए हैं जिसमे ३५०० से ज्यादा लोग मारे गए है । घायल लोगों की यह तादाद ५००० के ऊपर है । इन तमाम धमाकों की साजिश की पड़ताल चल रही है , लेकिन किसी भी मामले में पुलिस को कामयाबी नहीं मिली है। कुछ मामलों में सरगना की गिरफ्तारी का दावा जरूर किया गया है लेकिन कई मामले में पुलिस हाथ मलते ही नज़र आई है । आतंकवाद से लड़ने की यह है हमारी सरकार की प्रतिबधता । हमें कभी इंडियन मुजाहिदीन तो कभी लश्कर तो कभी हुजी तो कभी हिज्ब के हाथ होने की बात बताई जाती है । लेकिन हर बार नो दिन चले ढाई कोस ही साबित हुआ है । इन दिनों एक नया संगठन अभिनव भारत का नाम लिया जा रहा है । मालेगोवं में बोम्ब ब्लास्ट के सिलसिले प्रज्ञा सिंह ठाकुर सहित कई लोग पकड़े जा चुके है । लेकिन सेना के एक बड़े अधिकारी श्रीकांत पुरोहित की गिरफ्तारी ने एक नई साजिश की ओर इशारा किया है । कह सकते हैं कि भारत में इस तथाकथित इस्लामिक आतंकवाद की जड़ राम मन्दिर आन्दोलन की प्रतिक्रिया की उपज थी । बाबरी मस्जिद और राम जनम भूमि का मामला पहलीवार १८८५ में एक ब्रिटिश जज के सामने लाया गया था । १९४९ में राम लाला की मूर्ति यहाँ स्थापित की गई । इसके बाद यह मस्जिद वर्षों तक बंद रही । १९८६ में राम लाला के दर्शन की अनुमति दी गई तो रामजन्म भूमि आन्दोलन का एक बहाना भी हिंदू संगठनो को मिला । १९९२ में जब उग्र हिंदू संगठनो ने बाबरी मस्जिद को ढहाया तो जाहिर सी बात थी कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अस्तर पर इसकी प्रतिक्रिया भी हुई । पडोशी देशों में सैकडो मन्दिर ढहा दिए गए और भारत में साम्प्रदायिक हिंसा का जो सिलसिला शुरू हुआ कमोवेश आज भी जारी है । इस तरह सियासत तथाकथित सेकुलर और कोम्मुनल खेमों में बाँट दी गई । आज भारत में अलग अलग राज्यों में अलग अलग भूमिका में १७७ आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं । इसमें कई संगठनों का सरोकार उग्र वाम दल से है तो कई का सरोकार नॉर्थ ईस्ट के चर्च से है तो कई का सरोकार पडोशी मुल्क पाकिस्तान - बांग्लादेश देश से है । पिछले दिनों अभिनव भारत और हिंदू जागरण मंच के नाम आने से यह बात भी सामने आई है की कुछ हिंदू वादी संगठन आतंकवाद का जवाब आतंक से देने का मंसूबा बनाया है । यानि इन संगठनो का माने तो स्टेट आतंकवाद पर लगाम लगाने में नाकामयाब रहे है तो इसका जवाब उन्होंने इस नए रूप में दिया है । लेकिन आज अति उत्साह में कुछ लोग इसे हिंदू आतंकवाद का नाम दे रहे हैं , यह जानते हुए भी आज देश के १० राज्यों में चल रहे नक्सल आन्दोलन का सरोकार हिन्दुओं से ही है ,वाम विचारधारा के ये हिंदू अतिवादी हिन्दुओं पर ही हमले कर रहे है । नक्सल प्रभावित इलाकों में ऐसा नही है की muslim आवादी गरीब नहीं है उपेक्षित नहीं लेकिन मरने मारने का यह तरीका उन्हें सूट नहीं करता , या ये भी की इस आन्दोलन में धर्म उग्र विचारधारा में दब सा गया । लेकिन कभी हमने ये समझने की कोशिश नहीं कि नक्सल आन्दोलन से जुड़े ये कौन लोग है ,समाज के उपेछित ये लोग न तो कभी हिंदू गौरब की बात बने न ही उन्हें कभी हिंदू आतंकवादी कहा गया । योजना आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक नक्सल आन्दोलन का मुख्या वजह हिंदू समाज की जाती और छुआछुत की कुप्रथा है । सर्वे के मुताबिक आज भी ७३ फीसद ऊँचे लोग दलित और आदिवासियों को अपने घरो में प्रवेश वर्जित कर रखा है । वे आज भी दलितों के साथ भोजन करने से परहेज करते हैं । इसमे कोई दो राय नही कि कुछ लोगों ने बन्दूक के जरिये सत्ता पाने का इसे एक जरिया भी बनाया है । इस तरह देश में फैला आतंकवाद सत्ता की विसात पर महज मोहरे है जिसका इस्तेमाल सियासी पार्टी अपने अपने वोट बैंक के हिसाब से कर रहे हैं । और देश के आम लोग हिंदू बोम्ब ,muslim बोम्ब से लहुलाहन हो रहा है ।आतंक का कोई मजहब नहीं होता कश्मीर में जारी जेहाद का शिकार ज्यादा तर muslim ही हुए हैं । आज जेहाद का दायरा फ़ैल चुका है ,पढ़े लिखे लोगों में कट्टरता सर चढ़ कर बोल रही है केरल का नौजवान मुजाहिदीन बनकर आज कश्मीर में लश्करे तोइबा का साथ दे रहा है ।क्या इसका मुकाबला प्रज्ञा सिंह ठाकुर की विचारधारा से किया जा सकता है ?

टिप्पणियाँ

vaishali ने कहा…
हिंदू आतंकबाद को लेकर जिस तरह पिछले दिनों देश में सियासत का एक नया दौर शुरू हो गया है ये काफी खतरनाक है क्युकी आतंकबाद को किसी मजहब के दायरे में नही देखा जन चाहिए लेकिन इस भावना को भरकाने में हमारे प्रमुख राजनितिक दल ही आहम भूमिका निभा रहे है। जिस तरह राजनीती का मिजाज बदल रहा है वो दिन पर दिन खतरनाक मोर लेता जा रहा है और जल्द ही इस तरह की राजनीती बंद नही हुयी तो ऐसे लोगो को ज्यादा मदद मिलेगी जो देश को बिभाजीत करने में लगे है ।
vaishali ने कहा…
हिंदू आतंकबाद को लेकर जिस तरह पिछले दिनों देश में सियासत का एक नया दौर शुरू हो गया है ये काफी खतरनाक है क्युकी आतंकबाद को किसी मजहब के दायरे में नही देखा जन चाहिए लेकिन इस भावना को भरकाने में हमारे प्रमुख राजनितिक दल ही आहम भूमिका निभा रहे है। जिस तरह राजनीती का मिजाज बदल रहा है वो दिन पर दिन खतरनाक मोर लेता जा रहा है और जल्द ही इस तरह की राजनीती बंद नही हुयी तो ऐसे लोगो को ज्यादा मदद मिलेगी जो देश को बिभाजीत करने में लगे है ।
dr. ashok priyaranjan ने कहा…
बहुत अच्छा िलखा है आपने । कई प्रश्नों को उठाकर प्रखर वैचािरक अिभव्यिक्त की है । अपने ब्लाग पर मैने समसामियक मुद्दे पर एक लेख िलखा है । समय हो तो उसे भी पढे और अपनी राय भी दें
http://www.ashokvichar.blogspot.com
Dr birbal Jha ने कहा…
Dear Vinod Mishra ji
You have raised a pertinent question at the end of your opinion piece.Problem is that the so-called Indian politicians find it the safest way to bake their cake,taking for granted that we do not understand their cunningness.Media too are the pupits in the hands of these non deserving political leaders.

Can you dare to expose the tactics of these politicians to the common people who blindly elect them ?
Dr birbal Jha ने कहा…
Dear Vinod Mishra ji
You have raised a pertinent question at the end of your opinion piece.Problem is that the so-called Indian politicians find it the safest way to bake their cake,taking for granted that we do not understand their cunningness.Media too are the pupits in the hands of these non deserving political leaders.

Can you dare to expose the tactics of these politicians to the common people who blindly elect them ?
बेनामी ने कहा…
LED line lights have also become hugely popular for household usage.
Consumers "going green" have already begun switching out their
incandescent bulbs for compact fluorescents, which are miniature full-sized fluorescents.
These chips directly convert electricity to light without the use of a
filament or glass bulb.

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