कपिल सिब्बल साहब यह जिद क्यों है

आदरणीय,
 कपिल सिब्बल जी

एक प्रखर प्रवक्ता के रूप में आपको  वर्षों से इस मुल्क ने करीब से देखा है .कानूनी दावपेंच और अकाट्य तर्कों के जरिये आपने अबतक अनर्गल बातों में भी जान डालने की जो महारत  हासिल की है ,देश को आप पर नाज है ..2 जी के घोटाले में  देश एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ रु  लूट लेने की चिंता से बाहर नहीं हो रहा था  .लेकिन संचार मंत्रालय सँभालते ही आपने देश को अपने तर्कों से आश्वस्त करने की कोशिश की कि  दरअसल कोई घोटाला हुआ ही नहीं .ये बात अलग थी कि  सरकारी जाँच एजेंसी सी बी आई ने आपकी बातों पर तब्बजो नहीं दिया .अपने काले ड्रेस  का जो चमत्कार आपने सियासत में दिखाया आज इस चमत्कार से हर छोटी बड़ी पार्टिया अभिभूत है .आज हर पार्टी का प्रवक्ता कोई न कोई वकील है .लेकिन विज्ञानं के क्षेत्र में आपकी बढ़ी रूचि ने देश को एक बड़े  संकट में ड़ाल दिया है .इन दिनों आप आई आई टी की परीक्षा में सुधार लाने की जिद  पर अड़े है .आपने इसे नाक का सवाल बना लिया  है .यह देश के 7 लाख बच्चों के जिंदगी का सवाल है लेकिन अपने अकाट्य तर्कों से आप देश को कम सरकार को ज्यादा संतुष्ट करना चाहते है . सामाजिक न्याय और प्रतिभा खोज का दायरा बढाने के चक्कर में आपने जिसका भी भला किया हो( मुस्लिम बच्चो को 4 फिसद आरक्षण देने की आपकी जिद ने आज आई आई टी उतीर्ण 450 मुस्लिम बच्चो के भविष्य को अधर में लटका दिया है ) लेकिन इस देश के लाखों छात्र आपकी जिद के कारण हतोत्साहित है .

आप मानते है कि आई आई टी प्रथम प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु के सपनो का संस्थान है .आप यह भी मानते है कि आई आई टी के फैकल्टी ने भारत  को पूरी दुनिया में गौरव दिलाया है .आप यह भी मानते है कि  देश के प्रोद्योगिकी विकास में इन संस्थानों का अमूल्य योगदान है .फिर यह अधिकार आपको किसने दिया कि भैसे की तरह किसी सजे बगीचे में घूस कर उसे  तहस नहस कर दे। आई आई टी के तमाम प्राध्यापक आपकी सलाह से इत्तिफाक नहीं रखते लेकिन आप जबरन अपनी वकालत घुसेरे हुए हैं  .आपके घर में कोई बच्चा आई आई टी की तैयारी कर रहा होगा इसकी सम्भावना कम है .ऐसा नहीं है कि आपके बच्चे या रिश्तेदार प्रतिभाशाली नहीं होंगे लेकिन इस दौर में जिस कठिन परिश्रम और लम्बी पारी खेल कर बच्चे सफल होने की जिद करते है .शायद आप जैसे सुविधा संपन्न परिवार के बच्चे ऐसी जिद नहीं कर सकते .आई आई टी हम जैसे गरीब और मध्यम परिवार के बच्चो को आसमान छूने के ख्वाब जैसा है .वह अपनी पूरी प्रतिभा और लगन से जीवन का रास्ता खोजता है. मेरे जैसे परिवार के इन बच्चो के साथ साथ माता पिता  ने अपनी तमाम गतिविधि बंद करके अपने घर को जेल  बना दिया है .लेकिन आप उनकी प्रतिभा और मिहनत पर शक करते है .आपका मानना है की ये बच्चे कोचिंग से प्रतिभा उधार में ले आते है .

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके से इस बार 175 आदिवासी बच्चों  ने  आई आई टी और  ए इ इ इ में  कामयाबी पाई है .दंतेवाडा के जिला कलेक्टर ने "प्रयास" कोचिंग खोलकर गरीब बच्चो के सपनो को साकार किया है .आज छत्तीसगढ़ सरकार ने पटना के सुपर 30 की मदद से इस प्रयास को पुरे आदिवासी इलाके में खोलने की योजना बनायीं है .लेकिन आप की जिद है की बारहवी की परीक्षा में 20 प्रतिशत  टॉपर को ही आई आई टी की परीक्षा में शामिल होने का मौका मिले जबकि 80 फीसद  प्रतिभाशाली बच्चो को इस दौर से बाहर कर दिया जाय .आपके ध्यानार्थ यह बताना जरुरी है की +2 के इन टॉपर बच्चो में 10 फीसद  भी आई आई टी की परीक्षा में उतीर्ण नहीं हो पाते .वजह कोचिंग का ट्रिक नहीं है वजह सिर्फ सिलेबस है .देश के 42 राज्य बोर्ड का अलग अलग सिलेबस है तो अलग मानक लेकिन आपका तर्क है कि इससे गरीब बच्चो को आगे आने का मौका मिलेगा .गरीब बच्चे किस तरह आई आई टी का खाव्ब देख रहे है यह बात सुपर 30 के संस्थापक आनद बेहतर बता सकते है .
चाँदी का चमचा मुह में डाल आप पैदा हुए है ..शायद आप उन मेधावी बच्चो के ख्वाब को नहीं जान  सकते जो बड़ी मुश्किल से अपने लिए कापी - किताब जुटा कर आई आई टी का जिद पाले हुए  हैं . .उसकी यह जिद इसलिए भी है कि उन्हें  भरोसा है कि आई आई टी उसके साथ अन्याय नहीं करेगा लेकिन राज्य बोर्ड किस बच्चे के साथ कितना न्याय करता है सरकार में रहकर शायद आप इसे बेहतर जान सकते है .
हर साल +2 के इम्तिहान में डी पी एस के छात्र -छात्राओ को अब्बल देखकर आपका मन जरूर बाग़ बाग़ होता होगा, लेकिन एकबार उन बच्चो को यह सवाल जरूर पूछिये जिन्होंने तालीम किसी सरकारी स्कूल में ली है.बिहार ,उत्तर प्रदेश के कई स्कूलों में वर्षो से विज्ञानं शिक्षक नहीं है .राज्य सरकार मेधावी शिक्षको की बहाली करने में अक्षम है लेकिन सिब्बल साहब आप गरीबों  बच्चों  को न्याय दिलाने के नाम पर शायद  डी पी एस और संसकृति के बच्चो की पैरवी कर रहे है .
अंत में सिब्बल साहब जिस देश में हर साल लाखों -करोडो रूपये घोटालों की  भेट चढ़ जाते है क्या उस देश में 1000-2000 करोड़ रूपये खर्च करके गरीब बच्चों के लिए कोचिंग की व्यवस्था नहीं की जा सकती? .नारायण मूर्ति ने गरीब और पिछड़े तबके के मेधावी  बच्चो को विशेष कोचिंग दिलाकर उन्हें प्रतिभा के दम पर पद हासिल करने का जज्बा दिया था .आरक्षण को बढ़ावा देने के बजाय गरीब बच्चों को बेहतर तालीम की जरूरत है जो आप नहीं दे सकते लेकिन आप लोगों में संशय फैला रहे है की देश के कोचिंग संसथान गरीब बच्चों का हक़ छीन रहे है मेरे जैसा एक साधारण आदमी अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा किस तरह  बच्चों के कोचिंग पर खर्च करता है, इस जज्बे को आप शायद ही समझ सकते हैं . सर ,अगर आपके पास कोई आइडिया नहीं है तो  कोचिंग को निशाना बनाकर बच्चों के भविष्य के साथ मत खेलिये .जिस दिन आप आई आई टी के लिए कोई मरेथान रेस की शर्त रखेंगे ये कोचिंग संस्थाएं  अपने बच्चो को दोड़ने के लिए ट्रेंड कर देगी .अगर आप  जिद कर सकते है तो कृपया स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधरने की जिद करे . आपकी यह जिद देश के लाखों गरीब बच्चों को नया जीवन दे सकती  है जिसे किसी कोचिंग की कभी  जरूरत ही नहीं होगी ....
सादर ...
एक अभिवावक



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