संदेश

2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
चित्र
आदरणीय  नीतीश कुमार जी , प्रख्यात अर्थशास्त्री श्री जगदीश भगवती ने कहा था कि उच्च विकास दर गरीबो के लिए भी फायदेमंद हो सकता है और गरीब जनता इसका इनाम भी देती  है .बिहार मे आपको  पिछले 15 वर्षो से  मिला समर्थन इस बात को पुष्टि करता है कि जातीय फॉर्मूले के ध्वस्त करके बिहार के लोगों ने आपके सुशासन पर भरोसा कायम रखा है । लेकिन १४-१८ घंटे की बिजली ,चमचमाती सड़कों के बीच ग्रामीण अंचलो में बढ़ती बेरोजगारों की फ़ौज ,कृषि क्षेत्रो में बढ़ रहे पलायन ,ऊपर से नीचे तक फैले भ्रष्टाचार और लगातार बंद पड़े उद्योग आपके सुशासन की कलई खोल रहा है। अपने हलिया बिहार दर्शन में  मैं इस सचाई से अवगत हुआ किआपके सुशासन की धार कुंद पड़ती जा रही है और जनता दलालों के संगठित गिरोह के सामने बेवस है और आप नशाबंदी ,बाल विवाह और दहेज़ जैसी सस्ती लोकप्रियता लेने को आतुर हैं। ये पिटे हुए मुद्दे हैं ,ये आपको जननायक नहीं बनाएंगे। 

.जिस बिहार मे बाढ़ के नाम पर हर साल २००-२५० करोड़ रूपये का घोटाला आम बात है  ,कभी चारा घोटाला ,सृजन घोटाला ,कभी साडी घोटाला तो कभी अलकतरा घोटाला ,घोटालों की लम्बी फेहरिस्त  ने आज चारा घोटाला को इतिहास मे …
चित्र
इनदिनों  दिल्ली के मीडिया में इतना शोर क्यों है भाई ? क्या इसलिए कि  मीडिया अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा सजग हो गया है या फिर सोशल मीडिया ने उसकी जमीन खिसका दी है। या फिर खबरों और तर्क के आकाल में मीडिया के स्वनामधन्य एंकर  अपनी सुविधा से नए तर्क गढ़ रहे हैं। लेकिन अपने अपने तर्कों को लेकर जिस बेहूदापन और ओछी हरकत को टी आर पी बनाया जा रहा है वह कही से लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ नहीं लगता बल्कि यह  सभ्य समाज के लिए गाली है। गौरी लंकेश की दुखद हत्या की खबर को दिल्ली के  मीडिया ने  मसाला बना दिया। ,लोकतंत्र में आज़ादी के नाम पर देश के प्रधानमंत्री तक  को गाली देने में कोई कोताही नहीं बरती यह जानते हुए भी कि घटना कर्नाटका में हुई जवाब कांग्रेस के मुख्यनत्री सिद्धिरामय्या को देना है लेकिन सवाल नरेंद्र मोदी से पुछा जा रहा है। 

यह इसलिए कि घटना के तुरंत  बाद राहुल गाँधी ने ट्वीट करके इस हत्या में बीजेपी और  आरएसएस का नाम लिया था। एन डी टी वी के वरिष्ठ एंकर रवीश कुमार  कहते है यह शक इसलिए पैदा करता है क्योंकि गौरी लंकेश संघ की विचारधारा के खिलाफ लिखती रही है। लेकिन अल्ट्रा माओइस्ट विचारधारा की  गौ…

देश बदल रहा है ,आगे बढ़ रहा है

चित्र
पी एम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार से  कई भ्रम टूटे  हैं। मीडिया के कुछ वरिष्ठ लोगों का यह भ्रम कि सत्ता के अंदर और बहार की खबर वे ब्रेक कर सकते हैं। कुछ लोगों का यह भ्रम कि सरकार अक्सर  मीडिया की नजरों से व्यक्तित्व की परख करती है। कुछ लोगों का यह भ्रम कि मंत्रिमंडल का  विस्तार  जाति और क्षेत्र से तय होता है । कुछ बुद्धिजीवियों का यह भ्रम कि  सरकार के हर फैसले में आर एस एस का नाम जोड़कर खबरों में बहस की गुंजाइस बनायीं जा सकती है। पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जिन फेक खबरों को हवा दे रहा था। हमारे अनुभवी टीवी पत्रकार उसे सच मानकर डंके की चोट पर और  खबर तह तक का विश्लेषण कर रहे थे। 

सरकार और पॉलिसी को लेकर हमने जो फ्रेम बनाया है उसके इतर देखने समझने की सोच हमने विकसित नहीं की है। पिछले 28  वर्षो से गठबंधन की सरकार की पैटर्न हमारी सोच को लगभग कुंठित कर रखी है। जाहिर है इस फ्रेम से बाहर न तो देश के बुद्धिजीवी निकल रहे हैं न ही मीडिया और न ही नौकरशाही। जरा सोचिये आर के सिंह , सत्यपाल  सिंह ,  अल्फोंज कन्नाथम ,हरदीप   सिंह  पुरी ऐसे कई नाम हैं जिनके नाम की चर्चा संघ…

जिम्मेदारी सबकी बनती है

चित्र
यह तन विषय की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
सीस दिये जो गुरु मिलै, तो भी सस्ता जान...  भारत की गुरु -शिष्य  परम्परा में कबीर ने भी मुक्ति और मोक्ष के लिए गुरु को ही साधन माना था। पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में गुरु की इस  शानदार रिवायत  ने सामाजिक जीवन में इंसानियत के आदर्शो को गौरवान्वित किया था। और जीवन में त्याग को ही आदर्श बना दिया। पंचकूला में  32 लोगों की जानें बाबा के  आदर्शो को बचाने में नहीं गयी है बल्कि  बाबा के  अहंकार और लालच ने मासूमो की जान ले ली है।  जब से तथाकथित गुरुओ  ने " डेरा " को स्थायी निवास मानना कर शुरू  दिया।  डेरा का रास्ता सत्ता और बाजार से जोड़ दिया तबसे बाबा  राम रहीम ,रामपाल ,आशाराम ,भीमानंद ,नित्यानंद,जय गुरु देव ,रामवृक्ष  जैसे गुरुओं ने बाज़ार और भक्तो के जरिये अपने डेरों को पावर सेंटर /वोट बैंक में तब्दील कर दिया और सियासी दलों को  डेरा के  चौखट पर ला खड़ा कर दिया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल मीडिया के उन  बुद्धिजीवियों से भी है जो कभी डेरा को आध्यात्मिक केंद्र बताकर टीवी चैनलों पर उनका महिमामंडन करते हैं। और कभी बाबा को चरित्रहीन बताकर उनके भक्तो को भड़का…

बाढ़ :उपेक्षित बिहार हर बार सियासत का ही शिकार होता है

चित्र
बाढ़? ” 
“बकरा नदी का पानी पूरब-पश्चिम दोनों कछार पर ‘छहछह’ कर रहा है। मेरे खेत की मड़ैया के पास कमर-भर पानी है।”
“दुहाय कोसका महारानी!” 
इस इलाके के लोग हर छोटी-बड़ी नदी को कोसी ही कहते हैं। कोसी बराज बनने के बाद भी बाढ़?... कोसका मैया से भला आदमी जीत सकेंगे? 
..लो और बांधों कोसी को! 
“अब क्या होगा?” कल मुख्यमंत्रीजी ‘आसमानी-दौरा’ करेंगे।
...केंद्रीय खाद्यमंत्री भी उड़कर आ रहे हैं।नदी-घाटी योजना के मंत्रीजी ने बयान दिया है।और रिलीफ भेजा जा रहा है। चावल-आटा-तेल-कपड़ा-किरासन-तेल-माचिस-साबूदाना-चीनी से भरे दस सरकारी ट्रक रवाना हो चुके हैं।
...कल सारी रात विजिलेंस कमिटी की बैठक चलती रही।

फणीश्वरनाथ रेणु के 40 साल पुराने संस्मरण को पढ़कर लगा ,कुछ भी तो नहीं बदला है। .बिहार, बाढ़ और भ्रष्टाचार की कहानी में। गंगा ,सोन ,पुनपुन ,फल्गु ,कर्मनाशा ,दुर्गावती ,कोसी ,गंडक ,घाघरा ,कमला ,भुतही बलान ,महानंदा इतनी नदियाँ जो जीवन धारा बन सकती थी लेकिन साल सिर्फ तबाही लाती है और हमारी सरकार फिर  अगलीबार का इन्तजार करती है।  बिहार के 18 जिलों में जलप्रलय है 2 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित है। 155 से  ज्यादा लोग मार…

गाली से न गोली से बात बनेगी बोली से : पी एम मोदी का नया संकल्प

चित्र
आज़ादी के 70 वें सालगिरह पर प्रधानमंत्री मोदी का लाल किला से सम्बोधन एक नयी शुरुआत ,एक नयी पहल का आगाज है ।   नए भारत के संकल्प के साथ  कश्मीर पर सरकार का दृष्टिकोण कश्मीरियत से लवरेज है  जिसमे हिंसा की कोई जगह नहीं होगी। "गाली से न गोली से बात बनेगी गले लगाने से प्यार की बोली से " क्या वाकई में ऐसे हालत कश्मीर में है या प्रधानमंत्री ने  इस दर्शन को आगे रखकर एक नयी शुरुआत का मन बनाया है ? 

याद कीजिये "बम से न गोली से बात बनेगी बोली"  से अटल जी  के दौर में तत्कालीन सी एम मुफ़्ती मोहम्ममद सईद ने यह नारा दिया था। कश्मीर में एक नयी पहल की जीद  अटल जी ने  की थी ।याद दिलाने की जरूरत यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में मिलिटेंसी इससे ज्यादा गंभीर थी। श्रीनगर अस्सेम्ब्ली और संसद पर  अटैक उन्ही के दौर में हुआ था लेकिन वाजपेयी ने कश्मीर में अपना तार कभी टूटने नहीं दिया। जो लोग कहते थे अब्दुल्लाह के बिना कश्मीर नहीं ,बिना रिगिंग के वोट नहीं वहा फ्री एंड फेयर इलेक्शन करवाकर गैर अब्दुल्लाह फैमिली के शख्स को शासन में आने का मौका उन्होंने  फ़राहम कराया। पहलीबार यहाँ जम्हूरियत क…

इन १००००० बच्चो को किसने मारा

चित्र
5 दिनों में 60 बच्चो की मौत ! जिम्मेदार कौन ? सन 1978  से 1  लाख बच्चों  ने गोरखपुर  के इसी बी आर डी  मेडिकल कॉलेज ,हॉस्पिटल में दम तोडा है। तो इस शर्म से हमारे तीन पीढ़ियों के नेताओं को डूब मरना चाहिए।  उत्तर प्रदेश के 7  जिले और बिहार के तीन जिलों में मानसून सीजन  में  हर साल हजारो बच्चो पर  इंसेफ्लाइटिस /  ब्रेन फीवर मानो काल  बन कर टूटता है और हर साल 700 -800 बच्चो को अपनी  माँ के आँचल से छीन लेता है। तक़रीबन 3 करोड़ की आवादी वाले पूर्वांचल के इन जिलों में एक मात्रा यह हॉस्पिटल अपने टूटी फूटी व्यवस्था से हजारो माताओ को यह आस्वस्त करता रहा कि उसका बच्चा जरूर घर लौटेगा लेकिन अक्सर माँ अपने सूनी आँचल के साथ ही घर लौटती है। वजह इलाके के नीम /हाकिम से इलाज कराकर ,थके हारे माता पिता बी आर डी मेडिकल कॉलेज के शरण में आता  है लेकिन अफ़सोस इन  40  वर्षो में इस महामारी से लड़ने के लिए हमने बिलखते माताओ को अकेले छोड़ दिया। 
मीडिया आज सी एम योगी से जवाब मांग रहा है ,माँगना चाहिए क्योंकि वे आज मुख्यमंत्री हैं और 20 वर्षो से गोरखपुर का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं लेकिन सवाल उन साबिक मुख्यमंत्रियों से  क्य…

एक बड़े सियासी बेईमानी का पर्दाफाश होने वाला है

चित्र
आज़ादी के 70 वें सालगिरह पर एक बड़े सियासी बेईमानी का पर्दाफाश  होने वाला है। इस पर्दाफाश की चिंता ने सियासी तौर पर एक दूसरे के दुश्मन समझे जाने वाले लोगों को एक मंच पर ला दिया है। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री अचानक अपने घोर विरोधी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह से मिल रही है तो सी एम मेहबूबा मुफ़्ती कश्मीर के सियासी रहनुमाओ को गोलबंद कर रही है। चौंकिए नहीं ! संविधान की हिफाजत की दुहाई देते हुए हुर्रियत लीडर सैयद अली शाह गिलानी कश्मीर बंद का आह्वान कर रहे हैं ,कल तक कश्मीर के विलय पर ही सवाल उठा रहे थे। आखिर ये हंगामा क्या है ,किसने बड़पा है ? सवाल बहुत हैं लेकिन जवाब ढूंढने से पहले यह जानना जरूरी है : 1 . क्या आपको मालूम है जम्मू कश्मीर ऐसा एकलौता राज्य है जहाँ सैकड़ो वर्षो से रह रहे बाल्मीकि समाज के  लाखों लोगों  को झाड़ू उठाने /सफाई करने के अलावा कोई नौकरी नहीं मिलती।  2. यह कि पिछले 70 वर्षों से राज्य में रह रहे लाखों लोगों को नागरिकता नहीं मिली है और न ही ये लोग सरकारी नौकरी और रासन कार्ड हासिल कर सकते  3 . जम्मू कश्मीर से बाहर अगर बेटी ने शादी की तो उसकी नागरिकता ख़तम हो जाती है और उसके बच्चो को स्ट…

समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई.

चित्र
समाजवाद बबुआ धीरे-धीरे आई...हाथी से आई, घोड़ा से आई......लाठी से आई, गोली से आई..लेकिन अंहिसा कहाई, समाजवाद..   गोरख पांडेय ने क्या खूब लिखा था। तब जब ये आज के समाजवादी कही  चर्चा में नहीं थे। तो क्या कांग्रेस की तरह लोहिया जी के चेलों ने भी  समाजवाद  को पूंजीवाद के  चासनी में डालकर एक अलग फार्मूला  बना डाला  ? तो क्या भारत में समाजवाद सिर्फ सत्ता हथियाने का जुगाड़ मंत्र  बना और अपने ही भार से दब कर बिखर गया। पहले लोग कहते थे समजवादी और मेढक को तौलना बराबर का काम है लेकिन आज  एक राज्य में पुत्र मोह में सरकार चली गयी तो एक राज्य  में पुत्र ने सत्ता को परमानेंट बनाने के लिए पिता को ही बर्खास्त कर डाला। तो शायद गोरख पांडेय ने सही कहा था। परसों ले आई ,बरसो ले आई ,हरदम अकासे तकाई। समाजवाद उनके धीरे धीरे आई। 


समजवादी कभी फासीवादी ताकतों से लोहा लेने के एकजुट होते थे  तो आज उनके लिए साम्प्रदायिकता सबसे बड़ी चुनौती बन गयी   है। यानी ये सारे पैतरे सिर्फ वोट बैंक के लिए होता है। लेकिन बबुआ को सत्ता सौपने को आतुर समजवादी यह भूल जाते है कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी आज अपनी बारी का इन्तजार कर र…

ये राजनीति कब प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी बन गयी !

चित्र
लालू जी ! आप तो ऐसे न थे ,या ऐसे ही थे और हम लोग गलत समझ बैठे थे। बिहार में कुछ वरिष्ठ  पत्रकारों ने महागठबंधन में मचे  महासंग्राम पर लालू जी को क्लीन चीट देने की कोशिश की है ,तो कुछ लोगों ने नीतीश जी की तुलना में चाँद को भी पीछे कर रखा है। राजनितिक पंडित मानते हैं कि बुनियाद ,महाभारत ,रामायण सिरियल के बाद लालू ही ऐसे शख्स थे जिसे टेलीविज़न ने ब्रैंड बना दिया ,लेकिन आज लालू और उनके सियासी उत्तराधिकारी कहते है कि लालू जी के बगैर टीवी न्यूज़ नहीं बनती ।  तो क्या लालू  न्यूज़ चैनेल्स के लिए कपिल शर्मा शो थे या लालू  निर्मल बाबा वाली "कृपा " भक्तो पर बरसाते रहे थे  ! अगर ऐसा ही था  तो लालू जी को एक संस्था एक विचार बताने वाले  पत्रकारों को यह बताना चाहिए कि सर्वेंट क्वाटर से अपनी सियासत शुरू करने वाले लालू आखिर किस संस्था और विचार को पाकर पटना के तीन एकड़ में फैले बिहार का सबसे बड़ा मॉल का  मालिक बन बैठे।  ,देश के अलग अलग मेट्रो शहर में उनके बच्चों ने फॉर्म हाउस और करोडो रूपये की  प्रॉपर्टी बना ली। या इसलिए कि  कुछ बुद्धिजीवियों ने लालू जी को  डॉक्टर लोहिया से भी बड़े सामाजिक न्याय के …

बुरहान वानी को किसने मारा

चित्र
बुरहान ! तुम्हारे चले जाने के एक साल बाद भी कश्मीर में कुछ लोग तुम्हे बहुत याद करते हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सैफुद्दीन सोज़ कहते हैं ,तुम अगर जिन्दा होते तो वे तुमसे जरूर बात करते। ये अलग बात है जब तुम्हारे पोस्टर सोशल मीडिया पर छपते थे ,तुम्हारे आतंक की खबरे अखबारों में छपती थी , तब वे केंद्र में कैबिनेट मंत्री थे। वे चाहते तो तुम्हारे घर आ सकते थे ,लेकिन वे नहीं आये। जाहिर है वे  झुठ बोल रहे हैं और सिर्फ सियासत कर रहे हैं । ठीक उसी तरह जैसे हुर्रियत लीडर से लेकर पाकिस्तान तुम्हे एक सियासी मोहरा बनाकर आज भी बेच रहे हैं। हर कोई तुम्हारे नाम पर सियासी रोटी सेक रहा है। लेकिन यह जानकार तुम्हे भी दुःख होगा कि तुम्हारे नाम से जो सियासी हंगामा खड़ा किया गया उसमे अबतक 110 मासूमो की जान चली गयी ,सैकड़ो स्कूल जला दिए गए ,जो अबतक वैसे ही राख के ढेढ़ बने हुए हैं ।   तुम्हारे जाने का मुझे भी दुःख था क्योकि तुममे कुछ करने का जज्वा था लेकिन तुमने गलत लोगो को अपना आदर्श माना  ! ठीक वैसे ही अफसोस मुझे तब हुआ था जब लोग तुम्हे कश्मीर में हिज़्ब के पोस्टर बॉय कहने लगे थे। स्थानीय कॉलेज…

अकेला गुनगुनाता हूँ। न मैं चुप हूँ न गाता हूँ

चित्र
90 के दशक में कश्मीर की हालात पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखा था :
न मैं चुप हूँ न गाता हूँ,समय की सदर साँसों ने 
चिनारों को झुलस डाला, ,मगर हिमपात को देती 
चुनौती एक दुर्ममाला,  बिखरे नीड़, विहँसे चीड़, 
आँसू हैं न मुस्कानें, हिमानी झील के तट पर 
अकेला गुनगुनाता हूँ। न मैं चुप हूँ न गाता हूँ मरहूम डी एस पी मोहम्मद अयूब पंडित की  भाभी कहती है , 'हम किस मुक़ाम पर आ गए हैं कि एक पवित्र रात को हम जामिया मस्ज़िद के बाहर एक शख़्स को बर्बर तरीके से मार डालते हैं. 'क्या हम इसी आज़ादी के लिए लड़ रहे हैं ". श्रीनगर के इस  जामिया मस्जिद ने देखा है अयूब पंडित को बचपन से लेकर कलतक  दुआए करते हुए ,पवित्र रातो में नमाज पढ़ते हुए। लेकिन पिछले  पवित्र  रात को  उसकी जिम्मेदारी बदल गयी थी और एक जज्वाती पुलिस अफसर ने अपने तमाम सिपाहियों को इफ्तार के बाद छुट्टी दे दी और खुद नमाजियों की सुरक्षा में लग गया। लेकिन सलामती की दुआ मांगने वाली  भीड़ ने उसे अपना दुश्मन समझ लिया और उसकी सलामती को तार तार कर दिया। मस्जिद के अंदर मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ मौजूद थे और उन्मादी भीड़ डी एस पी अयूब के बदन से…

आतंकवाद और क्रिकेट :सियासत या बाज़ार

चित्र
भारत पाकिस्तान क्रिकेट मैच के लिए बाजार सज  चूका है। इतनी बुरी तरह हारने के बाद भी  एक बार फिर पाकिस्तान चैम्पियन्स ट्रॉफी के फाइनल में कैसा पहुंचा ? कुछ लोग कहते हैं  इस जंग के  लिए बाज़ार का दवाब था ?,लेकिन कश्मीर मे  जो जंग वर्षो से जारी है क्या वह बाज़ार का हिस्सा नहीं है ? माहे रमज़ान में कश्मीर में आतंकवादियों के खुनी खेल के बीच वादी के सबसे बड़े मौलवी मीरवाइज़ उमर  फ़ारूक़ का पाकिस्तान की जीत के  लिए दुआ, यह दर्शाता है कि जहां दाम मिले वहीं  ज़िंदाबाद। 
मीरवाइज़ यह जानते हुए भी मस्त है कि जिस दिन   वह पाकिस्तान के लिए दुआ कर रहे थे , उसी दिन पाकिस्तान के दहशतगर्दो ने एक क़ाबिल पुलिस अफसर फ़िरोज़ डार सहित 7 पुलिस कर्मी की जान लेली। अनंतनाग में ड्यूटी पर मौजूद  फ़िरोज़ डार को लश्कर के दहशतगर्दो ने घात  लगाकर हमला बोला था और उनकी टीम को गोलियों से छलनी कर दिया। अपने टॉप लश्कर कमांडर जुनैद मट्टू के मारे जाने से बौखलाए दहशतगर्दो ने पुलिसकर्मियो के चेहरे  पर इतनी गोलिया  दागी थी जिसे उनको पहपाना पाना भी मुश्किल था फिर भी अगर मीरवाइज़ और गिलानी  इस  घिनोने ,बर्बर  हमले के वाबजूद  क्रिकेट का मज़ा लेन…

मध्यप्रदेश अजब है सबसे गजब है ,धरने पर सी एम शिवराज

चित्र
आदतों और विज्ञापनों से दबे हुए आदमी का
सबसे अमूल्य क्षण सन्देहों में
तुलता है,हर ईमान का एक चोर दरवाज़ा होता है
जो सण्डास की बगल में खुलता है
दृष्टियों की धार में बहती नैतिकता का
कितना भद्धा मज़ाक है,कि हमारे चेहरों पर
आँख के ठीक नीचे ही नाक है। ये पंक्तिया कवी धूमिल ने चाहे जिस  सन्दर्भ में लिखी हो लेकिन मौजूदा की सियासत पर सटीक बैठती है।  मध्य प्रदेश के सी एम् शिवराज किसानो के सबसे बड़े हितैषी माने जाते हैं। खाट पर किसानो के साथ शिवराज की पंचायत  मध्य प्रदेश के अखबारों में पहले पेज पर छपती थी , टी वी  उनका किसान संवाद टी वी वालों की कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गया था। लेकिन उग्र आंदोलन में  6 किसानो की मौत के बाद शिवराज घुटने टेके अनसन पर बैठे हैं। यह उस राज्य का हाल है जिसका कृषि विकास दर 14 फीसद है और शिवराज इसके लिए पुरष्कृत भी हो चुके हैं। यानी तथाकथित किसानो को कर्जा माफ़ी से कम मंजूर नहीं हैं ,अपने राहुल बाबा भी यही चाहते हैं .. देश के तमाम किसानो का कर्जा मॉफ हो जैसे उन्होंने अपने राज में किया था। 

तो भैया राहुल जी 2009 में ठीक चुनाव से पहले एक गरीब देश के अर्जित धन को आपकी मम्मी की सरक…

शिक्षा के मामले में बिहार हो या कश्मीर सियासत एक जैसी है ?

चित्र
हर साल जून में बिहार की शिक्षा पर जबरदस्त बहस होती है। हरबार कोई 12 वी का अजूबा  टॉपर मीडिया के सवालों के घेरे में होता है।लेकिन हर साल बिहार से सैकड़ो बच्चे आई आई टी से लेकर आई ए एस की परीक्षा में हंगामेदार उपस्थिति दर्ज करते हैं लेकिन उसकी चर्चा मीडिया में कही नहीं होती। पहलीबार कश्मीर में 18 नौजवानो ने आई ए एस के इम्तिहान में कामयाबी दर्ज की है। आज इसकी चर्चा हर जगह है।  क्योंकि कश्मीर में स्कूल जलाये जा रहे हैं ,नौजवान पत्थर चला रहे हैं फिर ये टॉपर्स कहाँ से आये ? यह कोई पूछने वाला नहीं है कि बिहार में स्कूल  तो 90 के दशक में जला दिए गए ..  ,शिक्षा का तो सिर्फ ढांचा खड़ा है।केंद्रीय फंड की लूट ने पूरी  शिक्षा व्यवस्था को ढेकेदारों के हवाले कर दिया है।  फिर ये सैकड़ो बच्चे आई आई टी और आई ए एस के इम्तिहान में कैसे कामयाब हो रहे हैं। 

सवाल ज्यादा है लेकिन जवाब सिर्फ यह है कि इस दौर में कश्मीर हो या बिहार बच्चों के माता पिता ने जान लिया है की ज्ञान से ही सब कुछ हासिल किया जा सकता है। गरीबी से निजात पाने के लिए आज  शिक्षा ही एक मात्र  माध्यम है.  इन राज्यों में ज्ञान और करियर के लिए अपना …

तीन साल मोदी सरकार और कश्मीर

चित्र
125 करोड़ देशवासियों के लिए तीन साल मोदी सरकार का अनुभव अलग अलग हो सकता है। अलग अलग राज्यों में इसकी लहर भी अलग अलग हो सकती है। लेकिन इस बात पर सबकी राय एक हो सकती है कि "देश बदल रहा है" ,कश्मीर और पाकिस्तान का जिक्र छोड़ दें तो "आगे भी बढ़ रहा है "। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर नोटबंदी जैसे " कड़े फैसले और बड़े फैसले "लेकर पीम मोदी ने लीक से हटकर चलने का जज्वा दिखाया है। "सबका साथ सबका विकास " की सच्चाई को दिल्ली की उज्मा अहमद से बेहतर कौन बता सकता ? जिसे मोदी सरकार ने पाकिस्तान के मौत के कुंए से बाहर निकाल लाया है । लेकिन 30 साल से अपने देश में निर्वासित जी रहे कश्मीरी पंडित /लोगों की घर वापसी क्यों नहीं हो पायी यह सरकार के सामने बड़ा सवाल है। खुले में शौच जैसे मुद्दे को गंभीर मसला बनाकर मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान छेड़ दिया तो लाखों गाँव और हजारो शहर ओ डी एफ हो चुके हैं। लेकिन कश्मीर को लेकर ऐसा जनअभियान क्यों नहीं बन पाया ।
वरिष्ठ कोंग्रेसी लीडर मणि शंकर अय्यर की टीम और बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा का कश्मीर दौरा , हो सकता है कि संवाद की पहल…