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अच्छे दिन ! आने वाले हैं .... कब, यह किसी ने नहीं पूछा

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अच्छे दिन ! आने वाले हैं .... कब, यह किसी ने नहीं पूछा। भलेमानुष एक दिन बदलने में 24 घंटे लगते हैं ,हालात बदलने में कुछ तो वक्त चाहिए। मेरे जैसा एक साधारण  व्यक्ति अच्छे दिन के लिए जीवन भर संघर्ष करता है फिर राहुल गाँधी ,लालू यादव ,अखिलेश ,मायावती जैसे नेता किस अच्छे दिन का उपहास कर रहे हैं। क्या जिन प्रयासों से इन लीडरों ने अपने लिए अच्छे दिन बनाये है.  यह  क्या आम आदमी के लिए संभव है ? यानी ईमानदारी की कमाई और व्यवस्था से अच्छे दिन लाने में कुछ तो वक्त लगेगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अच्छे दिन का मतलब क्या है ? किसी के लिए अच्छे दिन का मतलब एक छोटे काम के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर न लगाना पड़े ,किसी के लिए उसके बच्चो की शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त हो जाए ,किसी के लिए उन्हें रोजगार मिल जाये ,किसानों को खेत में पानी और खाद मिल जाए ,किसी बुजुर्ग को वक्त पर पेंशन मिल जाय ,स्कूल कालेज जाने वाली बेटिया निर्भीक घूम सके ,स्वास्थ्य  और सड़क यातायात आसान हो सके कचहरी /अदालत से जल्दी न्याय मिल जाय  ,हर तरफ कानून का राज हो .. अच्छे दिन की ये छोटी सूची है लेकिन यकीन मानिये इस सूची का सरोकार शायद…