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पाकिस्तान में मिडिल क्लास का न होना ... और हिंदुस्तान का मिडिल क्लास

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पाकिस्तान में फ़ौज ने बड़ी चालाकी से एक और तख्ता पलट को अंजाम दिया है। पाकिस्तान की सुप्रीम  अदालत ने फौजी अफसरों की जांच में वजीरे आज़म नवाज़ शरीफ को आचरण से  ईमानदार नहीं पाया और उन्हें  पहले सत्ता से बाद में सियासत से ताउम्र के लिए बेदखल कर दिया । फ़ौज की जिलालत और बेइज्जती  से आहत नवाज़ शरीफ पाकिस्तान को अलविदा कहते हुए एकबार फिर लंदन जा बसे हैं. लेकिन पाकिस्तान में कोई शोर गुल नहीं है। न ही मीडिया में इसको लेकर कोई तीखी प्रतिक्रिया है। सोशल मीडिया मजहबी और दहशतगर्द तंजीमो के प्रोपगैंडा से अबतक ऊपर नहीं उठा है। वजह पाकिस्तान में मिडिल क्लास का न होना अहम् है। एक ही वक्त दो मुल्क वजूद में आया पाकिस्तान और हिन्दुतान लेकिन वहां आज़ादी के 70 साल के बाद भी जमींदारों ,पुराने रजबारो और कारोबारियों का उच्च वर्ग है जो हुकूमत हैं या फिर  फौज के आलाधिकारी है. दूसरा तबका  निम्न वर्ग का है जिनकी भूमिका मजदूरी  और मजहबी तंजीमो के एक्टिविस्ट के रूप में  है। अल्लाह ,अमेरिका और आर्मी के इस अलायन्स ने कभी मध्यम वर्ग पनपने ही नहीं दिया । 

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